निजी स्कूलों की मनमानी रोकने शासन-प्रशासन असफल दिख रहा है – पब्लिक वॉइस*

 

*निजी स्कूलों की मनमानी रोकने शासन-प्रशासन असफल दिख रहा है – पब्लिक वॉइस*

*जब तक छात्रों व पालकों को राहत नही मिल जाती विरोध प्रदर्शन सतत जारी रहेगा – पब्लिक वॉइस*

*निजी स्कूलों द्वारा ग़ैरवाज़िब, मनमानी फ़ीस के लिये विभिन्न प्रकार से दबाव बनाया जा रहा, पालक अभिभावक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं – पब्लिक वॉइस*

जगदलपुर। निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर सामाजिक संगठन पब्लिक वॉइस लगातार शासन-प्रशासन के ध्यानाकर्षण के लिए प्रदर्शन कर रही है। उल्लेखनीय है कि कोरोना काल ने सभी के लिये आर्थिक समस्या उत्पन्न कर दिया है। भय और अस्थिरता के साये में सभी जीने को मजबूर है पर ऐसे समय मे भी निजी स्कूलों पालकों-अभिभावकों को राहत देने की बजाय उन पर गैरवाजिब फ़ीस के लिये दबाव बना रहे हैं जोकि सरासर अमानवीय है। उक्त बातें पब्लिक वॉइस के युवा प्रकोष्ट अध्यक्ष लखपाल सिंह और हरीश पारेख ने कही। श्री सिंह और श्री पारेख ने आगे कहा कि हम लगातार पालकों और स्कूलों के बीच समन्वय हेतु प्रयासरत है। पूर्व में भी हमारे द्वारा सम्बंधित व सक्षम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप के लिये निवेदन किया था जिसके बाद स्कूलों के प्रतानिधि और पालकों की बैठक जिला कलेक्टर कार्यालय के सभागार में हुई थी। उस समय जिला शिक्षा अधिकारी के स्पष्ट निदेश के बावजूद फीस को लेकर कोई खास परिवर्तन नही देखने को मिल रहा है।

मामले पर पब्लिक वॉइस के रोहित सिंह आर्य और बबला यादव ने कहा कि कोई सुनवाई नही होने की वजह से हमे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के समक्ष पुतला दहन का आयोजन करना पड़ा। हम आगे और उग्र आंदोलन करेंगे। ट्रस्ट और ग़ैर शासकीय समिति के नाम से पंजीकृत स्कूलों के समक्ष आख़िर क्यों शासन-प्रशासन घुटने टेक रही है यह समझ से परे है। श्री आर्य ने कहा कि जिस ऑनलाइन स्टडीज को ढाल बना कर स्कूल्स पालकों से फीस उगाही कर रहें हैं उन पर त्वरित प्रभाव से पूर्णतः रोक लगनी चाहिए क्योंकि ऑनलाइन क्लासेस के नाम पर यूट्यूब,वॉटसअप, वेबक्लास के वजह से बच्चों को दिन भर मोबाइल से चिपके रहना पड़ रहा है और उससे मिलने वाली गृहकार्यों को पुनः अपलोड करने को लेकर रात-रात भर बच्चों को मोबाइल से चिपके रहना पड़ रहा है जिससे बच्चों में सर दर्द, आंखों में जलन, सूजन, लाल हो जाना, पानी बहना और आंखों में तेज दर्द जैसे लक्षण आम हो गए है और कई अभिभावकों ने यह भी बताया कि बच्चे बहुत ज्यादा चिड़चिड़े भी होने लगे हैं।

पब्लिक वॉइस के परमेश राजा और इमरान बरवाटिया ने कहा कि कोरोना काल मे एक ओर जहां पालकों को राहत देने को लेकर शासन प्रशासन द्वारा बड़े-बड़े दावे किये जा रहें है वहीं निजी स्कूल मनमाने ढंग से नए नए पैंतरे आजमा कर पालकों पर दबाव और भय पैदा कर फीस वसूल रहें है। पालक अपने बच्चों भविष्य को लेकर मजबूरन कर्ज लेकर भी फीस पटाने को विवश हो रहें है। जहां माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मात्र ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी गयी है वहीं निजी स्कूल इसे ढाल बनाकर वर्षभर की फीस 3 अथवा 4 किश्तों में एक साथ पालकों से भुगतान करने को दबाव बना रहे हैं। आम जनता ऐसे ही कोरोना के चलते चौतरफा आर्थिक बोझ तले दबी हुई है उसके ऊपर निजी स्कूलों की 3 किश्तों में फीस की लूट से अभिभावक और भी ज्यादा परेशान हो रहें है। उल्लेखनीय है कि तय किश्तों में फीस का भुगतान न करने पर स्कूलों द्वारा न ही मार्क्स शीट दी जा रही है और न ही अगले कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया ऐसे बच्चों के भविष्य को लेकर पालक बहुत चिंतित है लेकिन इस परिस्थितियों को लेकर शासन-प्रशासन के कान के जूं तक नहीं रेंग रही है। परमेश ने कहा कि स्थानीय प्रशासन जल्द इस ओर संज्ञान लेकर कड़ी कार्यवाही नहीं करती तो पब्लिक वॉइस आगे और उग्र आंदोलन करेगी।

 

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

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