देश से मानसून की विदाई, जाते- जाते भी झूमकर हो रही बारिश, सामान्य से नौ फीसदी ज्यादा बारिश, इस साल सामान्य रहेंगी सर्दियां, लेकिन कई इलाकों में शीत लहर और बर्फबारी अक्टूबर- नवंबर माह में

देश से मानसून की विदाई, जाते- जाते भी झूमकर हो रही बारिश, सामान्य से नौ फीसदी ज्यादा बारिश, इस साल सामान्य रहेंगी सर्दियां, लेकिन कई इलाकों में शीत लहर और बर्फबारी अक्टूबर- नवंबर माह में

नई दिल्ली / देश से अब मानसून विदाई ले रहा है। लेकिन जाते – जाते भी कई राज्यों में झमा झम बारिश का दौर जारी है | हालाँकि इस बार पिछले साल की तुलना में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। कई सालों बाद यह पहला मौका है जब उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की सरहद पर स्थित बुंदेलखंड में सामान्य बारिश हुई | यह इलाका पिछले कई सालों से सूखा ग्रस्त रहा है | पिछले 120 सालों में यह 19वां साल है जब 109 फीसदी या उससे ज्यादा बारिश देश के विभिन्न इलाकों में पड़ी हो। जानकारों की माने तो 61 साल बाद ऐसा हुआ है कि लगातार दो सालों तक मानसून में बारिश सामान्य से ज्यादा दर्ज की गई हो।

जानकारी के मुताबिक पिछले साल 2019 में 110 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी | जबकि 2020 में बारिश का आंकड़ा 109 फीसदी रहा। इससे पहले साल 1958 में 109.8 फीसदी और 1959 में 114.3 फीसदी बारिश दर्ज की गई थी। इसके अलावा साल 1916 में 110 फीसदी और 1917 में 120 फीसदी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।

यही नहीं इस बार देश के 36 में से 31 सब डिविजन में सामान्य से ज्यादा बारिश देखी गई। इस साल के मानसून सीजन में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा बारिश देखी गई। चार महीने रहे मानसून में अगस्त महीने में 27 फीसदी बारिश दर्ज की गई। इस बार मानसून की वापसी लगभग 15 दिनों की देरी से हो रही है। मानसून की विदाई की तारीख सामान्य तौर पर 17 सितंबर होती है लेकिन इस बार मानसून ने जाने में देरी कर दी। इस साल ये विदाई की प्रक्रिया 28 सितंबर को राजस्थान और पंजाब से शुरू हुई। पूरे देश से मानसून की विदाई की सामान्य तारीख 15 अक्तूबर है।

मौसन वैज्ञानिक आर के जेनामनी के मुताबिक निसर्ग तूफान ने मानसून को जमीन क्षेत्र में खींचने और एक जून को ही दस्तक देने में मदद की। सामान्य तौर पर पूरे देश में मानसून आठ जुलाई को आता है लेकिन इस बार 26 जून को ही मानसून ने दस्तक दे दी। जुलाई में बंगाल की खाड़ी में मानसूनी विक्षोभ के पैदा ना होने से बारिश में काफी कमी देखी गई। मौसम विभाग ने जानकारी दी कि अगस्त के आखिर से प्रशांत महासागर में कमजोर ला-नीना और जुलाई से हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी बनाया हुआ है। विभाग ने बताया कि अक्तूबर से दिसंबर तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है, इसलिए इस बार सर्दियां सामान्य रहेंगी।

मौसम वैज्ञानिक बताते है कि इस बार सर्दी सामान्य रहेगी लेकिन कई हिस्सों में शीत लहर का प्रकोप अक्टूबर माह के अंतिम हफ्ते से ही शुरू हो जायेगा | उनके मुताबिक पहाड़ी इलाकों में इस बार पहली की तुलना में बर्फ़बारी जल्द शुरू हो सकती है | उनका मानना है कि कुछ इलाकों में तो अक्टूबर – नवम्बर माह में ही पहली बर्फबारी नजर आ सकती है |

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

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