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बस्तर में अब बड़े उद्योग लगाने आदिवासियों की जमीन का नहीं होगा अधिग्रहण, केवल शासकीय जमीन का ही होगा उपयोग – लखमा

बस्तर में अब बड़े उद्योग लगाने आदिवासियों की जमीन का नहीं होगा अधिग्रहण, केवल शासकीय जमीन का ही होगा उपयोग – लखमा

वनोपज पे आधारित उद्योग लगाने उद्योगपतियों को दी जाएगी प्राथमिकता, गोवा के फेनी की तर्ज पर अब होगा महुआ का बस्तर में उपयोग

जगदलपुर – छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग आबकारी एवं बस्तर के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने बस्तर दशहरा के अवसर पर मुख्यमंत्री प्रवास के एक दिन पूर्व कुछ अख़बार नवीसों से चर्चा की. इस चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल हटने के पश्चात प्रदेश में नए उद्योगों की सम्भावना तलाशने देश के दो औद्योगिक राज्य पंजाब एवं राजस्थान का दौरा किया. वहां उन्होंने राज्य के मंझले उद्योग एवं लघु उद्योग सञ्चालन करने वाले कुछ उद्योगपतियों से मुलाकात की. उनके अनुसार, पंजाब के लुधियाना शहर में साइकिल बनाने के उद्योग से लेकर साइकिल के कल-पुर्जों पर आधारित कई उद्योग हैं जिसमें प्रदेश के लाखों लोग जुड़कर अपना रोजगार चला रहे हैं. इसी प्रकार ऊनी वस्त्रों से सम्बंधित कई उद्योग वहां संचालित हैं जिसे उद्योगपतियों के अलावा महिलाओं के समूह भी उसे संचालित कर रहे हैं.

इसी प्रकार राजस्थान में हीरे तराशने से लेकर मार्बल की कटाई से सम्बंधित उद्योग फल-फूल रहे हैं. हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के लिए नयी उद्योग नीति बनायी है जिसमें, बस्तर को काफी प्राथमिकता दी है. इसके अनुसार बस्तर में लगने वाले उद्योगों के लिए किसी भी आदिवासी की जमीन का उपयोग नहीं किया जायेगा, वरन केवल शासकीय जमीन पर ही उद्योग लगाये जायेंगे. मुख्यमंत्री की मंशानुसार बड़े उद्योग के बजाय छोटे-छोटे उद्योग लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी. चूँकि, बस्तर वनों से आच्छादित संभाग है, इस संभाग के सभी जिलों में प्रमुख वनोपज के रूप में तेंदू पत्ता, महुआ, टोरा, चिरोंजी, इमली, काजू इत्यादि बहुतायत से पाए जाते हैं. अतः इनसे सम्बंधित लघु उद्योग लगाने, आने वाले उद्योगपतियों को शत-प्रतिशत सरकारी अनुदान भी दिया जायेगा.

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की उन्नत उद्योग नीति नहीं अपनाई गयी इसलिए बस्तर संभाग में बड़े, मंझले तथा लघु उद्योग नहीं लग पाए. वहीँ, एनएमडीसी द्वारा लगाये गए नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इसे बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगी. नगरनार स्टील प्लांट, बस्तर वासियों की संपत्ति है और इसका उपयोग केवल बस्तर वासियों के हित के लिए किया जायेगा. इसी लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने इसके निजीकरण के खिलाफ छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर घोषणा की कि एनएमडीसी अगर इसे संचालित नहीं करेगी तो राज्य शासन द्वारा इस स्टील प्लांट का सञ्चालन किया जायेगा.

श्री लखमा ने आगे कहा कि औद्योगिक रूप से विकसित जिले रायपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ में लगने वाले उद्योगों पर अब राज्य शासन द्वारा अनुदान नहीं दिया जायेगा बल्कि इनसे अलग अन्य जिलों में अगर कोई उद्योगपति उद्योग लगाना चाहे तो उसे शत-प्रतिशत अनुदान देने की बात राज्य शासन द्वारा कही गयी है. कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में बस्तर में विकास अब दिख रहा है. किसानों व तेंदुपत्ता हितग्राहियों को दिए जा रहे बोनस से आम बस्तरिया खुशहाल हुए हैं जिसका उदाहरण यह है इस बार के दशहरा में गाँव-गाँव से शहर पहुंचे लोग घुमने-फिरने एवं खरीदारी की है, उसने चेहरे पर दिखने वाली मुस्कान से प्रतीत होता है कि उनकी आर्थिक स्थिति विगत तीन वर्षों में मजबूत हुई है. कृषि क्षेत्र में बस्तर की तरक्की अब सड़कों पर भी दिखने लगी है. उन्होंने उदहारण देते हुए कहा कि पहले ओडिशा राज्य के कोटपाड शहर से सब्जियां शहर पहुँचती थी. वहां के व्यापारी मनमाने मूल्य पर बेचते थे पर विगत तीन वर्षों में लघु वनोपज के साथ ही साथ साग-सब्जी की इतनी उपज हुई है कि अब ग्रामीण लोग खेत से उपजे फल-सब्जियों के अलावा अपने गोठानों से उपजाए सब्जी लेकर सड़कों पर लाकर लोगों के सामने विक्रय हेतु रख रहे हैं. इससे यह साबित हो गया है कि पंद्रह वर्षों की सरकार के मुकाबले कांग्रेस की सरकार ने तीन वर्षों में ही आम बस्तर वासियों के लिए बेहतर कार्य किया है.

इस प्रवास के दौरान अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय निकाल कर मंत्री कवासी लखमा शहर से दैनिक अख़बार चैनल इंडिया कार्यालय पहुंच कर कर्मचारियों से सौजन्य मुलाकात की. इस अवसर पर मंत्री के साथ बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी, चैनल इंडिया के प्रबंध संपादक नरेन्द्र दुबे, सुब्बा राव, अर्जुन झा, बलराम दुबे के अलावा मशीन विभाग के कर्मचारीगण उपस्थित थे.

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