वन अधिकार एवं पेसा अधिनियम तथा धारा 170(ख) के संबंध में प्रशिक्षण एवं कार्यशाला संपन्न

 

वन अधिकार एवं पेसा अधिनियम तथा धारा 170(ख) के संबंध में प्रशिक्षण एवं कार्यशाला संपन्न

जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारी-कर्मचारियों को अधिनियम के उद्देश्यों की दी गई जानकारी

जगदलपुर, / वनाधिकार अधिनियम 2006 एवं पेसा अधिनियम तथा अनुसूचित क्षेत्र में भूमि क्रय-विक्रय की धारा 170 (ख) के संबंध में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को संभाग आयुक्त कार्यालय जगदलपुर के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में विषय विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा उपस्थित जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारी-कर्मचारियों को इन अधिनियमों के उद्देश्य, महत्व एवं बारीकियों के संबंधों में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। बैठक में जिला पंचायत के अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप के अलावा संचालनालय आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर के परियोजना अधिकारी मनोहर चौहान, उपायुक्त आदिवासी विकास विवेक दलेला सहित विषय विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

बैठक में विषय विशेषज्ञों के द्वारा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2006 के अंतर्गत वन एवं राजस्व ग्रामों की परिभाषाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों एवं अन्य परंमपरागत वन निवासियों को विकास कार्यों आदि के कारण विस्थापन एवं उन्हें होने वाले अन्य समस्याओं से मुक्ति दिलाने हेतु यह अधिनियम को लागू किया गया है। जिससे की इन लोगों को जल, जंगल एवं जमीन का अधिकार मिल सके। उन्होंने कहा कि वनों की रक्षा आदिवासियों और वहां रहने वाले लोगों ने किया है। इसलिए वहां की जल, जंगल जमीन पर वहां के लोगों का स्वभाविक अधिकार है। जिससे की उस क्षेत्र की वन एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञों द्वारा पांचवी अनुसूची क्षेत्र एवं पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम 1996 अर्थात पेसा कानून के महत्व एवं उद्देश्यों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। उन्होंने कहा कि पेसा कानून एक सरल लेकिन व्यापक एवं शक्तिशाली कानून है। जो अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों को अपने क्षेत्र के संसाधनों और गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण देता है। यह कानून ग्रामसभा को मजबूत करता है और लोगों की परंपराओं, रिति रिवाजों, उनकी सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक संसाधनों का प्रबंधन और विवादो का निपटारा करने के लिए सशक्त बनाता है।
प्रशिक्षण में पेसा कानून के प्रमुख विशेताओं की भी जानकारी दी गई। इसके अंतर्गत किसी राज्य की विधानमंडल, केंद्रीय कानून, पेसा कानून की मूल संरचना से असंगत कोई भी कानून को पारित नहीं करेगी। इसके अलावा पेसा क्षेत्र एवं सामान्य क्षेत्रों में ग्रामसभा आयोजित करने का अलग-अलग प्रावधान है। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बस्तर श्री गोकुल रावटे ने अनुसूचित क्षेत्र में भूमि क्रय-विक्रय की धारा 170 (ख) के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारी-कर्मचारियों का जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों के अलावा राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा अन्य संबंध के विभाग के अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

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