सरकारें सिर्फ इस कोठी का धान उस कोठी में डालकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही -शिवसेना

सरकारें सिर्फ इस कोठी का धान उस कोठी में डालकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही -शिवसेना

 

जगदलपुर /बस्तर प्रवक्ता शिवसेना के युवा इकाई युवासेना के प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय् ने बताया हैकि बस्तर की भौगोलिक और सामाजिक स्थितियों में नगरनार में स्टील प्लांट की आधारशिला सन 2001 में रखी गई। स्पष्ट है कि जब किसी भी जगह प्लांट बनता है तो वहाँ की जमीन ली जाती है लेकिन उसमें स्थानीय लोगों के हितों का ध्यान रखा जाना है, फिर अचानक निजीकरण विनेशीकरण की बात आ गयी। एनएमडीसी पिछले पांच दशकों से बस्तर में आयरन उत्खनन का कार्य कर रही है, यह बस्तर का इकलौता उधोग है जो पब्लिक सेक्टर का है , एक उम्मीद थीअगर पब्लिक सेक्टर का स्टील प्लांट बनेगा तो बस्तर का विकास होगा और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा होगी। 2001 से यह प्लांट प्रक्रियाधीन था और आज पूर्णतः की ओर है।

इसी बीच केन्द्र सरकार द्वारा एक षड्यंत्र के तहत नीति आयोग का गठन कर दिया गया जिसने नगरनार संयत्र को विनेशीकरण की सूची में डाल दिया और तर्क देते हुए कहा कि एनएमडीसी एक माइनिंग कम्पनी है जो स्टील प्लांट को हैंडल नहीं कर सकती इसलिये इसका निजीकरण आवश्यक है और डी मर्ज़र की घोषणा के साथ विनवेशीकरण के लिए टेंडर जारी कर दिए गए और इस प्रकार बस्तरवासियों के साथ छलावा किया गया चूंकि यहां पर पांचवी अनुसूची है अनुसूचित जनजाति का इलाका है आदिवासियों की जमीन पर प्रतिबंध है लेकिन छल कर पहले जमीन ली गई और पुनर्वास योजना जैसे पहले खेल खेला गया उसी स्थिति में आज बस्तरवासी – छत्तीसगढ़िया – नौजवानों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया ?

छत्तीसगढ़ शिवसेना ने केंद्र सरकार द्वारा इस कुत्सित प्रयास को विफल करने के लिए निजीकरण के विरोध में बस्तरवासियों एवं अपने छत्तीसगढ़ियों नौजवानों में 60% बस्तरवासियों के लिए 20% छत्तीसगढ़ियों के वास्ते और 20% टेकनिशयन अन्य के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतू 14 दिसंबर को चारामा बस्तर मचांदूर द्वार से कांकेर केशकाल होते हुए फरसगांव कोंडागांव से 16 दिसंबर को जगदलपुर एक आमसभा में परिवर्तित होकर विरोध दर्ज करा रही हैं ।

शिवसेना के आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी कितनी भयंकर है – दो हाथ से काम करने वालों की संख्या 64 करोड़ से ज्यादा है लेकिन इसमें से सम्मानजनक काम मात्र 5 करोड़ से कम लोगों को ही मिल पाया है जिसमें बैंकों में बीमा कंपनियों में सेना में वायुसेना नौसेना में थलसेना जलसेना – केन्द्र एवं राज्य सरकारों के पब्लिक सेक्टर में ही अभी तक स्थायी व्यवस्था हो पाई है।

बाकी के लोगों की कोई व्यवस्था नहीं है किसी को साल में 2 महीने और किसी को 3 महीने ही काम मिलता है, सरकार कोई सम्मानजनक काम नहीं दे पाई है।

किसानों का हाल इतना बुरा है मात्र 40% खेतों को ही पानी मिल पाता है 60% खेती आज भी भगवान या प्रकृत्ति भरोसे ही है इसलिये लोग अपना पेट भरने के लिए बडे़-शहरो में पलायन करते हैऔर शहरो में झुग्गीवासियों की आबादी 65% बढकर हो गई है, आजतक सरकारें सिर्फ इस कोठी का धान उस कोठी में डालकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। अरूण पाण्डेय् ने नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के विरोध में अनिश्चित कालीन धरना स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते कहा कि ऐसी व्यवस्था को बदलने के लिए शिवसेना का साथ दीजिये और हमारी पार्टी अनुरूप सदस्य बनिए और नगरनार स्टील प्लांट में ठेकेदारी प्रथा का पुरजोर विरोध कर बस्तरवासियों को हक मिलें-अपना मार्गदर्शन देकर शिवसेना के संघर्ष में शामिल होकर एक सच्चे बस्तरवासी – छत्तीसगढ़ियां होने का अपना दुबारा गर्व हासिल करें।

आज रायपुर से आए शिवसेना के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष मधुकर पाण्डेय व संगठन मंत्री राजेन्द्र चावला के साथ युवासेना प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय, कामगार सेना के प्रदेश सचिव ओंकार नाथ द्विवेदी, देवेंद्र शर्मा व अन्य कार्यकर्ताओं ने नगरनार में चल रहे अनिश्चित कालीन प्रदर्शन में उपस्थित रहकर पार्टी के तऱफ से अपना समर्थन प्रस्तुत किया।

इस दौरान मज़दूर यूनियन के नेताओं व ग्रामीणों से चर्चा हुई व आगामी 16 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष धन्नजय सिंह परिहार के नेतृव में होने वाली नगरनार मोर्चा हेतू रूपरेखा तय की गई।

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

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