छठ मैया की पूजा करने व्रतियों ने दिया सूर्य को अर्ध्य

 

छठ मैया की पूजा करने व्रतियों ने दिया सूर्य को अर्ध्य


जगदलपुर छठ पर्व जिले भर में धूमधाम से लेकिन कोविड 19 के निर्देशों के साथ मनाया जा रहा है । व्रतियों को पूजा – अनुष्ठान करने के लिए विशेष प्रबंध किए भोर से ही व्रतियों ने छठ घाटों में पानी के अंदर खड़े होकर सूर्य के उदय होने का इंतजार किया और सूर्योदय के साथ भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया ।


छठ पूजा पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन महापौर सफिरा साहू निगम अध्यक्ष कविता साहू एवं जनप्रतिनिधि ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी

गंगा मुंडा तालाब , मैं बने छठ घाटों में इस बार कोविड 19 संक्रमण के चलते लोगों की भीड़ कम दिखी लेकिन छठ व्रतियों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।
मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रौपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है।
यह पर्व उत्तर प्रदेश और खासकर बिहार में मनाया जाने वाला ये पर्व अपने आप में काफी खास है. इसे पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. छठ पूजा चार दिन तक चलती है. सूर्य देव की आराधना और संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए समर्पित छठ पूजा हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है.
छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को लोहंडा और खरना होता है. उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है. इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है. नहाय-खाय से लेकर उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देने तक चलने वाले इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है.

 

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *