आदिवासी अपना जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजार रहे हैं

आदिवासी अपना जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजार रहे हैं

सुकमा बस्तर जैसे सुदूर अंचलों के आदिवासी अपना जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजार रहे हैं, सरकारे सत्ता किसी भी दल के हो , आदिवासीयों के जीवन स्तर ठीक करने के दिशा में संवेदनशील नहीं है। इन दिनों राज्य सरकार के झूठी वादों के बहकावें में आम जनता खेती किसानी का काम छोड़कर अपने निर्दोष ग्रामीण ,जो जेलों में बंद है।
उन को राज्य सरकार द्वारा छोड़ने के झूठी फरमान के शिकार हो रहे हैं।ज्ञात हो कि इन दिनों पुलिस प्रशासन निर्दोष ग्रामीण आदिवासीयों को जमानत पर छोडे जाने का झूठी तसल्ली के झांसे में आ गये है ‌पुलिस गांव – गांव में जाकर जेल में बंद परिवार से कह रही है कि अपने वकील से सम्पर्क कर जमानत आवेदन पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करावे, शीघ्र छुट जायेंगे। इसके लिए जमानत आवेदन पत्र के समर्थन में शपथ पत्र देना आवश्यक है। ग्रामीण आदिवासी बड़ी आस लेकर वर्तमान में दर-दर भटक रहे हैं। दरअसल सही बात यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस पटनायक कमेटी में कोई भी अंतिम निर्णय लेकर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपा ही नहीं है, ऐसा लगता है कि पुलिस प्रशासन मौखिक निर्देशों पर न्यायालय में निर्दोष ग्रामीण आदिवासी जो जेल में बंद है। ऐसे लोगों को चयनित सूची तैयार कर उनके वकीलों से जमानत आवेदन पेश किया जा रहा है, न्यायालय सभी मामलों में जमानत आवेदन पत्रों को सभी प्रकरणों में निरस्त किये जा रहे हैं।।

राज्य सरकार यदि अपने वादों पर कायम हैं तो उन्हें निर्दोष ग्रामीण आदिवासीयों को छोड़ना चाहती हैं तो एक अध्यादेश पारित कर न्यायालय को देवे। यदि अभियोजन अपना प्रकरण वापस लेना चाहती है तो जमानत आवेदन पत्र पेश कराने का तमाशा क्यो होना चाहिए।अभी पटनायक कमेटी का कोई भी स्पष्ठ व निर्दोष ग्रामीण आदिवासीयों को रिहा किये जाने का निर्णय राज्य सरकार को सौंपा ही नहीं गया है। राज्य सरकार इस मामले में झूठ बोल रही है। हमें पूर्व कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन के निर्मला बुच कमेटी से सीख का तजुर्बा मिली है कि उस समय भी एक भी ग्रामीण निर्दोष आदिवासी नहीं छपा है। हमारे क्षेत्र व राज्य के केबिनेट मंत्री कवासी लखमा टी.वी. पेपरों में झूठी प्रचार कर रहे हैं।

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी जेलों में बंद निर्दोष ग्रामीण आदिवासीयों के नि:शर्त रिहा के परिपेक्ष्य में राज्य सरकारें से स्पष्ठ मांग करती है कि अपनी वादे के मुताबिक निर्दोष ग्रामीण आदिवासीयों के रिहाई के मामले में बहाना बाजी बंद कर इमानदारी से सभी ग्रामीण निर्दोष आदिवासीयों को रिहा करें।।

 

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *