दादा बलिराम कश्यप निजीकरण का समर्थन करते? बस्तर हितों की लड़ाई लडऩे के लिए जाने जाते

क्या दादा बलिराम कश्यप निजीकरण का समर्थन करते?
बस्तर हितों की लड़ाई लडऩे के लिए जाने जाते

है दादा
दादा व संजीव शर्मा ने मिल कर लड़ी थी नगरनार की लड़ाई

जगदलपुर। मोदी सरकार के द्वारा नगरनार का निजीकरण किया जाना बस्तर में चर्चा का विषय बन गया है, नगरनार प्लांट स्थापित करने की लड़ाई लडऩे में अहम भूमिका अदा करने वाले संजीव शर्मा ने बताया कि प्लांट की स्थापना के लिए दादा बलिराम कश्यप राजनीतिक मतभेद भूला कर इस प्लांट के स्थापित करने के लिए कांग्रेसियों के साथ खड़े रहे। उस वक्त संजीव शर्मा युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे, उन्होंने बताया कि प्लांट को लगाने के लिए नगरनार क्षेत्र में विरोध करने वाले लोगों का समझाने का हर संभव प्रयास मेरे व दादा बलिराम कश्यप के द्वारा, जिसकी वजह से आज नगरनार में प्लांट की स्थापना हो सकी। नगरनार प्लांट बस्तरवासियों की उम्मीद का एक किरण है जिसे मोदी सरकार निजीकरण के माध्यम से छिन लेना चाहिए है, उन्होंने कहा कि अगर आज दादा बलिराम कश्यप होते तो निश्चित ही इस निजीकरण का विरोध करते, लेकिन क्या वर्तमान में बस्तर के भाजपा नेता बलिराम कश्यप के सपने को पूरा करने के लिए मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल कर इस लड़ाई को लडऩे के लिए सामने आयेगें। गौरतलब है कि राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि दादा बलिराम कश्यप बस्तर हितों के लिए अपनी ही पार्टी के बड़े बड़े नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलने का इतिहास रहा है, जिसकों देखते हुए हर किसी को यह उम्मीद है कि अगर आज वह होते तो नगरनार के निजीकरण की विरोध भी पूरी ताकत के साथ करते। संजीव शर्मा ने बताया कि नगरनार का निजीकरण किया जाना पूरी तरह से गलत है, लोगों के सरकारी प्लांट होने के कारण ही इसकों मंजूरी प्रदान कर दी थी लेकिन मोदी सरकार पिछले दरवाजे से इस प्लांट का निजीकरण करके बस्तरवासियों को धोखा दिया है। उन्होंने बताया कि बस्तरवासी निजीप्लांट के खिलाफ है इसका प्रमाण टाटा स्टील प्लांट का सालों बाद भी नही लग पाना है।

Baski Thakur

बस्तर प्रवक्ता समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *