जगदलपुर। महारानी अस्पताल में लाखों रुपयों की कीमत से बना मरचुरी इन दिनों धूल खा रहे और शो पीस बनकर रह गया है। इसके बाद बावजूद शवों को 15 किमी डिमरापाल मेडिकल कॉलेज पीएम के लिए भेजा जाता है।
बता दें कि, बीते कुछ वर्ष पहले तक महारानी अस्पताल की हालत जर्जर हो चुकी थी। तब विपक्ष में रहे कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों से लेकर कार्यकर्ताओं ने महारानी अस्पताल में बनी अव्यवस्थाओं को लेकर भूख हड़ताल से विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महारानी अस्पताल में अव्यवस्था को दुरुस्त करते हुए सर्व सुविधायुक्त अस्पताल में तत्काल तब्दील कर दिया। कांग्रेस सरकार ने यहां नए चिकित्सकों और नए कर्मचारियों की भर्ती भी की। लेकिन अब इसी महारानी अस्पताल के मरचुरी में शवों को रखने वाले फ्रीजर की सुविधा नही है। यहां शवों को रखने के लिए केवल दो टेबल लगाकर रखा गया है। लेकिन मेकॉज बनने के बाद यहां शवों का पीएम होना ही बंद हो गया है। पूर्व में जब मेडिकल कॉलेज और महारानी अस्पताल से अलग हुआ तो एक खराब फ्रीजर को यहीं छोड़ दिया गया। जो अभी अस्पताल परिसर में खुले में रखा गया है। इस वजह से पीएम के लिए शवों को महारानी अस्पताल से 15 किमी दूर डिमरापाल मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता है। जिससे शहरवासियों के साथ ही क्षेत्र के दुरुस्त अंचलों से यहां पहुंचे मृतकों के परिजनों को काफी दिक्कतोंका सामना करना पड़ता है।
इस मामले में महारानी अस्पताल के अधिक्षक डॉ विवेक जोशी ने बताया की “हमारे पास सभी सुविधाएं उपलब्ध है। अगर जहां भी चिकित्सक को थोड़ा सा भी शक होता है तो ऐसे में शव को डिमरापाल मेकाज भेज दिया जाता है। लेकिन अगर मरीज की सामान्य मौत होती है तो उसके शव का पीएम यहां किया जा सकता है।”